Freedom movement in Urdu poetry

Freedom movement, Simon Commission, Urdu poetry
तहरीक़े आज़ादी और उर्दू शायरी : One of NRIfm.com listeners has sent this extraordinary radio feature about how India’s freedom movement was reflected in Urdu shayari. Recording seems to begin half way.
Courtesy AIR Urdu service.

अब दौरे मसर्रत आने दो, क़ौमी परचम लहराने दो
जाती है ग़ुलामी जाने दो, सदियों का दलिद्दर जाता है
हम तुमको बसर करना है यहीं, जीना है यहीं मरना है यहीं
उठो ये चमन शादाब करो वो ग़ासिबे ख़ुद सर जाता है

इक़बाल सुहैल

लीजिये सुनिए रेडियो फीचर  तहरीक़े आज़ादी और उर्दू शायरी

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