हिंदी दिवस पर बापू से मुलाकात; राकेश पाण्डेय

Bapu
आज मुंबई एयरपोर्ट पर बापू और मैंने एक साथ अख़बार बांचा। बापू से देश के हालात पर चर्चा हुई। बापू ने कहा हिंदी अख़बार लाओ, मैंने उन्हें बताया कि एयरपोर्ट पर हिंदी अख़बार बमुश्किल मिलते है।यंहा किताब की दुकान पर केवल अंग्रेजी की किताबे दिखाई देती है, हिंदी की किताब मांगने पर दुकानदार बड़ी ही हेय दृष्टि से देखता है।

मैंने बापू को बताया कि अब तो  तुम्हारे बंदर भी अंग्रेजी में बोलते है, काहे बापू तुम हिंदी के चक्कर में पड़े हो?

बापू बोले जब एक बार मैंने बी बी सी लन्दन तक को कह दिया कि मुझे अंग्रेजी नहीं आती, तो अब अंग्रेजी अख़बार तुम्हारे साथ सबके सामने पढूंगा तो लोग मुझे क्या समझेंगे?

बापू को धीरे से मैंने बताया, बापू अंग्रेजी मुझे तो सच में नहीं आती ये तो रोब गांठने के लिए दुनिया के सामने अंग्रेजी अख़बार लेकर पढ़ रहा हूँ।

बापू हिंदी के हालात पर गमगीन हो गए, बोले अच्छा हुआ मै अब इस दुनिया में नहीं हूँ , मेरे पुतलो से माडलिंग कराने वाले ये व्यापारी लोग , मुझे बेच तो रहे है लेकिन बचा नहीं रहे है। मै तो रोज मरता हूँ लेकिन विवश हूँ क्योकि अब मै केवल पुतला हूँ।

 

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